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चैनल: Blog


ब्लॉग्स (14)
भारत में दो क्षेत्र ऐसे हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदल गया - एक तो मगध जो बौद्ध विहारों की अधिकता के कारण "बिहार" बन गया और दूसरा दक्षिण कौशल जो छत्तीस गढ़ों को अपने में समाहित रखने के कारण "छत्तीसगढ़" बन गया। किन्तु ये दोनों ही क्षेत्र अत्यन्त प्राचीन ... आगे पढ़ें...

फिल्म देखकर निकला था वो। अंग्रेजी पिक्चर! किस-विस वाले बहुत से सीन थे उसमें। उत्तेजित हो कर निकला था। दूर से देखा एक घर के दरवाजे पर एक खूबसूरत महिला खड़ी है। जब उस घर के पास पहुँचा तो महिला घर के भीतर जाने लगी। वह भी उसके पीछे घर में घुस गया। महिला के ... आगे पढ़ें...

क्या कभी आपने सोचा भी है कि गिनती की शुरुआत कब, क्यों और कैसे हुई? मानव आरंभ से ही सामाजिक प्राणी रहा है। प्रगैतिहासिक काल में जब मानव गुफाओं में रहा करता था तब भी उनके समूह हुआ करते थे। जब तक ये समूह छोटे रहे, किसी प्रकार की गिनती की आवश्यकता नहीं थी। ... आगे पढ़ें...

मर रे मानव मरभूस्खलन से मरभूकंप से मरमुठभेड़ कर और मरबम विस्फोट से मरजहरीली शराब पी कर मरनकली दवा से मरश्रद्धालु बन, दर्शन हेतु जीप से जा और दुर्घटना से मरमरने से जरा भी न डरमरना तेरी नियति है इसलिये तू मरवेबदुनिया समाचार आगे पढ़ें...

मेरी पसंद की रचनाओं मेंडॉ. सरोजनी प्रीतम की रचनायमकतुम्हारी नौकरी के लियेकह रखा था सालों से,सालों से।श्लेषक्रुद्ध बॉस सेबोली घिघियाकरमाफ कर दीजिये सर,सुबह लेट आई थीकम्पन्सेट कर जाउँगी,बुरा न मानें अगरशाम को लेट जाउँगी। आगे पढ़ें...

मेरी पसंद की रचनाओं में सेइस्माइल जगदलपुरी की रचनानेताखादी नित पहना करें, सूरत है मनहूस।तीन देवियाँ साथ हैं, चंदा, थैली, घूस॥साहबरिश्वत खाकर बढ़ गया, बड़े साब का पेट।तीन देवियाँ साथ हैं, चाय, पान सिगरेट॥थानेदारछात्र पुलिस संघर्ष में, टूट गई है टाँग।तीन ... आगे पढ़ें...

कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली बांबे स्टुडिओ के प्रयोगशाला सहायक (laboratory assistant) थे| उन ही दिनों में नज़ाम-उल-हुसैन बांबे टाकीज के हीरो हुआ करते थे और नायिका होती थीं देविकारानी जो कि बांबे टाकीज के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं| किस्सा यों है कि बांबे ... आगे पढ़ें...


आर्टिकल डायरेक्टरी (article directory) जिसे हिन्दी में कृति निर्देशिका कहते हैं क्या होता है?आर्टिकल डायरेक्टरी (article directory) जिसे हिन्दी में कृति निर्देशिका कहते हैं एक प्रकार की निर्देशिका (directory) होती है जिसमें कोई भी रचनाकार अपनी किसी भी ... आगे पढ़ें...

शादी से पहले.....पतिः देर किस बात की है।पत्नीः क्या तुम चाहते हो मैं चली जाऊँ?पतिः नहीं, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकता।पत्नीः क्या तुम मुझे प्यार करते हो?पतिः अवश्य! एक नहीं अनेकों बार!!पत्नीः क्या तुमने मुझे कभी धोखा दिया है?पतिः कभी नहीं! तुम अच्छी तरह से ... आगे पढ़ें...

अब देखिये ना, मैंने ब्लोगर में एक नया पोस्ट कर के प्रकाशित किया नहीं कि फटाक से मेरे गूगल टॉक ने संदेश दिया कि एक नई टिप्पणी आई है। मन प्रसन्नता से झूम उठा, अरे भाई हूँ तो मैं भी साधारण ब्लोगिया ही, टिप्पणी के बारे में जान कर भला कैसे खुश नहीं होउंगा? और ... आगे पढ़ें...

अब पत्नी चाहे अवधिया जी की हो, चाहे पात्रो जी की हो, चाहे गुप्ता जी की हो या चाहे किसी अन्य व्यक्ति की हो, सभी में एक समानता तो जरूर पाई जाती है। वे सभी चाहती हैं कि अपने पति को अपनी मुट्ठी में ही रखें। और 99.99% पत्नियाँ अपने इस उद्देश्य में सफल रहती ... आगे पढ़ें...

मुझको ब्लोगर बना दीजियेमेरी रचना पढ़ा दीजियेअच्छा लिखूँ मैं या ना लिखूँटिप्पणी तो करा दीजियेलोकली मैं छपूँ ना छपूँनेट पर तो छपा दीजियेपोस्ट चोरी का है ये मेरामत किसी को बता दीजियेमूल गज़ललज़्ज़त-ए-गम बढ़ा दीजियेआप यूँ मुस्कुरा दीजियेकीमत-ए-दिल बता दीजियेखाक ... आगे पढ़ें...

पता नहीं किस झोंक में आईने के सामने खड़ा हो गया। आईने के सामने खड़ा हुआ ही था कि आवाज आई शर्म नहीं आती? सठियाने के उम्र में ब्लोगिंग करता है। सुन कर आश्चर्य हुआ।, घर में उस दिन मेरे सिवा और कोई नहीं था, मैं अकेला ही था। इधर उधर देखने लगा कि आखिर ये आवाज ... आगे पढ़ें...