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हँसिकाएँ

मेरी पसंद की रचनाओं में
डॉ. सरोजनी प्रीतम की रचना

यमक

तुम्हारी नौकरी के लिये
कह रखा था सालों से,
सालों से।

श्लेष

क्रुद्ध बॉस से
बोली घिघियाकर
माफ कर दीजिये सर,
सुबह लेट आई थी
कम्पन्सेट कर जाउँगी,
बुरा न मानें अगर
शाम को लेट जाउँगी।
अस्वीकरण