ुमुदलाल कांजीलाल गांगुली बांबे स्टुडिओ के प्रयोगशाला सहायक (laboratory assistant) थे| उन ही दिनों में नज़ाम-उल-हुसैन बांबे टाकीज के हीरो हुआ करते थे और नायिका होती थीं देविकारानी जो कि बांबे टाकीज के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं| किस्सा यों है कि बांबे टाकीज में फिल्म जीवन नैया बन रही थी और फिल्म में हीरो (नज़ाम-उल-हुसैन) हीरोइन (देविका रानी) को फिल्म की कहानी में भगाने के स्थान पर सचमुच ही भगा ले गये| हिमांशु राय भी कम न थे, खोजबीन करवा के दोनों को पकड़ मंगवाया| देविकारानी को तो क्षमा कर दिया उन्होंने पर नज़ाम-उल-हुसैन को बांबे टाकीज से निकाल बाहर कर दिया| अब समस्या यह थी कि हीरो कहाँ से लायें? अचानक उनके जेहन में बिजली सी कौंधी| प्रयोगशाला सहायक कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली नौजवान भी है और खूबसूरत भी, हीरो का रोल अवश्य फब जायेगा उसे| आदेश दे दिया उसे कि हीरो का रोल करो| बेचारे कुमुदलाल ने बहुत कहा कि मुझे अभिनय का क ख ग भी नहीं आता पर उनकी एक न चली, नौकरी जो करनी थी| कुमुदलाल का फिल्मी नाम भी रख दिया हिमांशुराय ने - फिल्मी नाम था अशोक कुमार| फिल्म बनी और चली भी, ये बात अलग है कि फिल्म देविकारानी की वजह से ही चली पर अशोक कुमार बन गये हीरो| तो हुज़ूर जिसके किस्मत में हीरो बनना लिखा होता है उसे बनना ही पड़ता है|
अशोक कुमार आखिर हीरो कैसे बने
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ुमुदलाल कांजीलाल गांगुली बांबे स्टुडिओ के प्रयोगशाला सहायक (laboratory assistant) थे| उन ही दिनों में नज़ाम-उल-हुसैन बांबे टाकीज के हीरो हुआ करते थे और नायिका होती थीं देविकारानी जो कि बांबे टाकीज के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं| किस्सा यों है कि बांबे टाकीज में फिल्म जीवन नैया बन रही थी और फिल्म में हीरो (नज़ाम-उल-हुसैन) हीरोइन (देविका रानी) को फिल्म की कहानी में भगाने के स्थान पर सचमुच ही भगा ले गये| हिमांशु राय भी कम न थे, खोजबीन करवा के दोनों को पकड़ मंगवाया| देविकारानी को तो क्षमा कर दिया उन्होंने पर नज़ाम-उल-हुसैन को बांबे टाकीज से निकाल बाहर कर दिया| अब समस्या यह थी कि हीरो कहाँ से लायें? अचानक उनके जेहन में बिजली सी कौंधी| प्रयोगशाला सहायक कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली नौजवान भी है और खूबसूरत भी, हीरो का रोल अवश्य फब जायेगा उसे| आदेश दे दिया उसे कि हीरो का रोल करो| बेचारे कुमुदलाल ने बहुत कहा कि मुझे अभिनय का क ख ग भी नहीं आता पर उनकी एक न चली, नौकरी जो करनी थी| कुमुदलाल का फिल्मी नाम भी रख दिया हिमांशुराय ने - फिल्मी नाम था अशोक कुमार| फिल्म बनी और चली भी, ये बात अलग है कि फिल्म देविकारानी की वजह से ही चली पर अशोक कुमार बन गये हीरो| तो हुज़ूर जिसके किस्मत में हीरो बनना लिखा होता है उसे बनना ही पड़ता है|
ुमुदलाल कांजीलाल गांगुली बांबे स्टुडिओ के प्रयोगशाला सहायक (laboratory assistant) थे| उन ही दिनों में नज़ाम-उल-हुसैन बांबे टाकीज के हीरो हुआ करते थे और नायिका होती थीं देविकारानी जो कि बांबे टाकीज के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं| किस्सा यों है कि बांबे टाकीज में फिल्म जीवन नैया बन रही थी और फिल्म में हीरो (नज़ाम-उल-हुसैन) हीरोइन (देविका रानी) को फिल्म की कहानी में भगाने के स्थान पर सचमुच ही भगा ले गये| हिमांशु राय भी कम न थे, खोजबीन करवा के दोनों को पकड़ मंगवाया| देविकारानी को तो क्षमा कर दिया उन्होंने पर नज़ाम-उल-हुसैन को बांबे टाकीज से निकाल बाहर कर दिया| अब समस्या यह थी कि हीरो कहाँ से लायें? अचानक उनके जेहन में बिजली सी कौंधी| प्रयोगशाला सहायक कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली नौजवान भी है और खूबसूरत भी, हीरो का रोल अवश्य फब जायेगा उसे| आदेश दे दिया उसे कि हीरो का रोल करो| बेचारे कुमुदलाल ने बहुत कहा कि मुझे अभिनय का क ख ग भी नहीं आता पर उनकी एक न चली, नौकरी जो करनी थी| कुमुदलाल का फिल्मी नाम भी रख दिया हिमांशुराय ने - फिल्मी नाम था अशोक कुमार| फिल्म बनी और चली भी, ये बात अलग है कि फिल्म देविकारानी की वजह से ही चली पर अशोक कुमार बन गये हीरो| तो हुज़ूर जिसके किस्मत में हीरो बनना लिखा होता है उसे बनना ही पड़ता है|

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