मुझको ब्लोगर बना दीजिये
मेरी रचना पढ़ा दीजिये
अच्छा लिखूँ मैं या ना लिखूँ
टिप्पणी तो करा दीजिये
लोकली मैं छपूँ ना छपूँ
नेट पर तो छपा दीजिये
पोस्ट चोरी का है ये मेरा
मत किसी को बता दीजिये
मूल गज़ल
लज़्ज़त-ए-गम बढ़ा दीजिये
आप यूँ मुस्कुरा दीजिये
कीमत-ए-दिल बता दीजिये
खाक लेकर उड़ा दीजिये
चांद कब तक गहन में रहे
आप ज़ुल्फें हटा दीजिये
मेरा दामन अभी साफ है
कोई तोहमद लगा दीजिये
आप अंधेरे में कब तक रहें
फिर कोई घर जला दीजिये
एक समुन्दर ने आवाज दी
मुझको पानी पिला दीजिये
मूल गजल सुनें:
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